जेल से सीखा हुनर, बाहर आते ही आजमाया, लेकिन बेवकूफी से हो गए गिरफ्तार

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अनुभव यादव। कोरोना काल में कोर्ट के आदेश पर मुजरिमों को यह सोचकर छोड़ा गया था कि वे अपने घर पर सुरक्षित रहेंगे, लेकिन वे बाहर आते ही फिर से वारदातों को अंजाम देने लगे। बताया गया है कि वेस्ट जिले के एएटीएस को सिपाही ललित की गुप्त सूचना के जरिए पता चला था कि कुछ लड़के चोरी की बाइक व स्कूटी बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इस सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर मनोज यादव के निर्देशन में एसआई मोहित प्रकाश, कुलदीप, एएसआई सुलोचन, राजकुमार, हवलदार राशिद व सिपाही ललित अपनी टीम के साथ उन बदमाशों के पीछे लग गए। टीम को पता चला था कि ये बदमाश किसी दुकानदार को चोरी की गाड़ी बेचने की कोशिश कर रहे हैं। यह सूचना खुद दुकानदार ने ही शक होने पर पुलिस को दी थी। टीम ने वहां जाकर रेड भी की, लेकिन उस दिन वे बदमाश पुलिस के आने से पहले ही चले गए थे।

इसके बाद 23 जून को टीम ने फिर से ट्रैप लगाया और शाम करीब साढ़े 5 बजे जैसे ही उन्होंने आउटर रिंग रोड के पास विकासपुरी इलाके में उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे भागने लगे। इसके बाद टीम उनके पीछे लग गई और थोड़ी देर पीछा करने के बाद स्कूटी सवार तीनों को पकड़ लिया। पुलिस ने जब उस स्कूटी की जांच की तो वह चोरी की निकली। इसके बाद उनसे और भी पूछताछ की गई तो तीनों ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से 7 स्कूटी व 5 बाइक रिकवर करवा दीं। इन तीनों ने ये सभी गाड़ियां अलग-अलग इलाकों से चोरी करके गलियों में रखी हुई थी। ये लोग बाइक व स्कूटी को चुराने के बाद किसी भी गली व सुनसान जगह पर खड़ी कर देते थे। पकड़े गए बदमाशों ने पूछताछ में अपना नाम 22 वर्षीय राजकुमार उर्फ राज निवासी निहाल विहार बताया है।

जबकि दूसरे का नाम 22 वर्षीय अजित सिंह उर्फ जीत है। यह भी निहाल विहार में ही किराए पर रहता है और तीसरा 16 साल का नाबालिग है, जो ख्याला का रहने वाला है। इसे पुलिस ने सभी औपचारिकताओं के बाद उसकी मां की कस्टडी में भेज दिया है। बाद में उसे कोर्ट में पेश करके निर्णय लिया जाएगा कि नाबालिग को कहां रखा जाए। जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि ये सभी बाइक व स्कूटी इन लोगों ने पिछले कुछ दिनों में ही चोरी की हैं। बताया गया है कि ये लोग बाइक/स्कूटी को चुराने के लिए डुप्लीकेट चाबी का इस्तेमाल नहीं करते थे, बल्कि ये गाड़ी के तार डायरेक्ट करके उसे चुराकर ले जाते थे। ये सभी नशे के भी आदि बताए गए हैं। पुलिस ने इनके पकड़े जाने से चोरी के 10 केस सुलझाने का दावा किया है। आगे की जांच अभी जारी है।

जेल से सीखा चोरी की गाड़ियां बेचना
पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि पकड़े गए राज व जीत को कोरोना वायरस की वजह से अप्रैल महीने में ही 45 दिनों की पैरोल पर छोड़ा गया था। ये दोनों पहले भी चोरी के मामलों में ही विचाराधीन कैदी थे। पहले ये गाड़ियों को चोरी करके उन्हें काटकर बेचते थे, जो मुश्किल से 5 हजार रुपए की बिकती थी। फिर जेल के अंदर रहकर इन्हें अन्य कैदियों से पता चला कि वे क्यों न इन चोरी की गाड़ियों के कागज बनवाकर बेचें, इससे पैसे भी अच्छे मिलेंगे। बस फिर क्या था, इन लोगों ने बाहर निकलते ही नकली पेपर बनाने वाले लोग ढूंढने शुरू कर दिए। हालांकि इन्हें अभी तक ऐसा कोई भी आदमी मिला नहीं था।

नाबालिग को लगाया चोरी के काम पर
इसी काम को आगे बढ़ाने व बड़े स्तर पर इसे करने के लिए इन लोगों ने ख्याला निवासी नाबालिग को भी अपने साथ मिला लिया था। बताया गया है कि यह नाबालिग इन्हें स्मैक पीता हुआ सड़क पर मिला था। चूंकि ये दोनों खुद भी नशे के आदि हैं, इसलिए इन लोगों ने नाबालिग को पुड़िया का लालच दिया और उसे बताया कि वह उनके लिए चोरी की बाइक या स्कूटी लेकर आए, जिसके लिए वे उसे रोजाना पैसे भी देंगे। उस नाबालिग ने यह बात अपने किसी साथी को बताई, जिसे वह उस्ताद बोलता था। इस तरह वे दोनों मिलकर चोरी की बाइक व स्कूटी इन दोनों को देने लगे।

कागज बनवाने के चक्कर में पकड़े गए
शायद ये बदमाश अभी पकड़े नहीं जाते, लेकिन इनकी बेवकूफी ने इन्हें जल्दी पकड़वा दिया। दरअसल ये लोग चोरी की बाइक व स्कूटी तो इक्कठा कर चुके थे। बस अब उन्हें खपाने की तैयारी चल रही थी, लेकिन इससे पहले इन दोनों को लगा कि असली बाइक/स्कूटी के लिए क्या क्या कागजों की जरूरत पड़ती है, पहले वो तो जान लें। इन्हीं कागजों की जानकारी और उन्हें बनवाने वाले आदमी को ढूंढने के लिए ये लोग दुकानों व शोरूम के चक्कर लगाने लगे। इसी दौरान एक दुकानदार को इन पर शक हो गया और उसने गाड़ी का नम्बर पुलिस को भेज दिया, जहां वह चोरी की निकली। इसके बाद से ही पुलिस इनके पीछे लग गई और ये बदमाश पकड़े गए। पुलिस अब उनके एक फरार साथी को ढूंढने में जुटी हुई है।

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