अब पुलिस स्टेशन में फरियादियों की सहायता करेंगे कानूनी सलाहकार

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नारद डेस्क। दशकों से हम देखते आ रहे हैं कि किसी भी जुर्म के बाद पुलिस बदमाशों को पकड़ती है और कोर्ट ले जाती है, लेकिन वहां वो बदमाश कानून के किसी न किसी हथकंडे को अपनाकर जेल जाने से बच जाता है। नतीजा जज सब कुछ जानते हुए भी आरोपी को छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं और पीड़ित के मन में कानून के प्रति घृणा आ जाती है। अब ऐसे में या तो पीड़ित अपना बदला खुद लेकर कानून हाथ में ले लेता है या फिर कमजोर पीड़ित पैर पीटते हुए बेचारों की तरह रोता रह जाता है। कानून के इस सिस्टम से भारत का हर एक शख्स वाकिफ है, लेकिन आज तक इसमें बदलाव नहीं आ सका। जो कमजोर पीड़ित उचित न्याय न मिलने की वजह से सब कुछ ऊपरवाले के हाथों में छोड़ देते थे, लगता है अब उनकी ऊपरवाले ने सुन ली। जी हां ऐसे बदमाशों को उचित सजा व पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए दिल्ली पुलिस ने अब कमर कस ली है। दिल्ली पुलिस ऐसा क्या बदलाव करने जा रही है, आइये बताते हैं पूरी खबर…

दिल्ली पुलिस आयुक्त एस एन श्रीवास्तव के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली पुलिस अब हर पुलिस स्टेशन, पुलिस चौकी, स्पेशल स्टॉफ, स्पेशल सेल, अपराध शाखा व आर्थिक अपराध शाखा समेत सभी शाखाओं में कानूनी सलाहकार रखने जा रही है। पुलिस आयुक्त ने बताया है कि दिल्ली पुलिस में अभी कुल 53 सब-डिवीजन हैं। इस हिसाब से हर एक सब-डिवीजन में एक कानूनी सलाहकार रखा जाएगा। सब-डिवीजन का प्रभारी सहायक पुलिस आयुक्त यानी एसीपी होता है और उसके तहत दो से तीन पुलिस स्टेशन आते हैं। ये कानूनी सलाहकार वहां बैठकर पीड़ितों को सही रास्ता बताएंगे। कानूनी सलाहकार के लिए कानून की डिग्री होना अति आवश्यक है। फिलहाल इनको दो वर्ष के लिए अनुबंध पर रखा जाएगा।

पुलिस आयुक्त के मुताबिक ये कानूनी सलाहकार किसी भी महत्वपूर्ण केस में जांच अधिकारियों की सुबूत एकत्रित करने, केस को कोर्ट में प्रस्तुत करने, जमानत याचिका का जवाब देने व चार्जशीट तैयार और कोर्ट में केस लड़ने में आईओ की सहायता करेंगे। पुलिस आयुक्त का मानना है कि इससे केस के जांच की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इसके लिए कानूनी सलाहकारों के साक्षात्कार की प्रक्रिया सितंबर महीने से शुरू कर दी गई है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कानूनी सलाहकार रखने की प्रक्रिया को अहम व बड़ा फैसला बता रहे हैं, क्योंकि दिल्ली पुलिस के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है, जिसकी अनुमति केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी दे दी है। पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि कानूनी सलाहकारों के लिए दिल्ली पुलिस में खबर लिखे जाने तक करीब 1200 वकीलों ने आवेदन किया है। वकीलों के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू हो गई है।

साक्षात्कार के बाद इनमें से फिलहाल 75 वकील रखे जाएंगे। इनमें से 53 कानूनी सलाहकार सब-डिवीजनों में रखे जाएंगे, जबकि बाकी 22 कानूनी सलाहकार दिल्ली पुलिस की अन्य यूनिटों में रखे जाएंगे। उन्होंने बताया कि ये कानूनी सलाहकार महत्वपूर्ण केस में जांच अधिकारियों की सुबूत एकत्रित करने, केस को कोर्ट में प्रस्तुत करने, जमानत याचिका का जवाब देने, चार्जशीट तैयार और केस लड़ने में मदद करेंगे। पुलिस आयुक्त मानते हैं कि कई बार साक्ष्यों के अभाव व जांच ठीक से नहीं होने की वजह से आरोपी कोर्ट से बरी हो जाता है। कानूनी सलाहकार रखने से आरोपियों को मिलने वाली सजा का प्रतिशत बढ़ेगा। इससे सीधा सीधा अपराधियों के मन में कानून का डर बढ़ेगा और वहीं पीड़ितों के मन में कानून के प्रति इज्जत बढ़ेगी। इस तरह दिल्ली पुलिस का यह कदम ऐतिहासिक माना जा रहा है, अब देखना यह है कि पुलिस और वकीलों की यह जुगलबंदी आम लोगों को कैसे फायदा पहुंचाती है।

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