दिल्ली हिंसा में दंगाइयों ने नेत्रहीन को भी नहीं बख्शा

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नारद डेस्क। दिल्ली में हुए दंगों का जैसे जैसे समय बीत रहा है लोगों की दर्द भरी कहानियां बाहर आ रही है। ऐसे ही एक दर्द को हम आज बताने जा रहे है। जिन्होंने दंगों में अपनी रोजी रोटी को खो दिया। दंगाईंयो को इतना भी तरस नहीं आया कि वो जिनकी रोजी रोटी जला रहे है वो आंखों से अंधे हैं।

दरअसल, दिल्ली दंगों में जहां लोगों के मकान और दुकानें जली। वहीं सैकड़ों लोग ऐसे भी है जो रेहड़ी लगा कर अपना घर चलाते थे। ऐसे ही एक शख्स जो नाबीना है, जिनकी पत्नी रेहड़ी लगा कर समान बेचती थी। दंगाइयों ने रेहड़ी को ना सिर्फ लूटा बल्कि उसमें आग भी लगा दी। उन्होंने भाग कर जान बचाई थी।

नाबीना हाफिज मुहम्मद असलम ने कहा कि मेरी पत्नी कच्ची खजूरी में रेहड़ी पर समान बेचती थी। 24 फरवरी की दोपहर जब दंगा शुरू हुआ तो वो भाग गई। 2 दिन बाद हमें पता चला कि दंगाइयों ने हमारी रेहड़ी को लूट कर उसमें आग लगा दी। उन्होंने कहा कि घर चलाने का यही एक साधन था जिसे दंगाइयों में खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि मेरे परिवार में 5 बेटियां और एक बेटा है 4 बेटियों की शादी ही चुकी है।

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