भारत में कोरोना वायरस की वैक्सीन पर काम शुरू, जल्द होगी टेस्टिंग

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नारद डेस्क। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रोफेसर के. विजय राघवन ने आज प्रेसवार्ता में बताया कि कोरोना वायरस को जड़ से खत्म करने के लिए हम वैक्सीन तैयार कर रहे हैं।

साधारणतः यह वैक्सीन 10-15 साल में बनती है और इसकी लागत 200 मिलियन डॉलर के करीब होती है। अब हमारी कोशिश है कि इसे एक साल में बनाया जाए, इसलिए एक वैक्सीन पर काम करने की जगह हम लोग एक ही समय में 100 से अधिक वैक्सीन पर काम कर रहे हैं।

प्रोफेसर के मुताबिक वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए।

किन-किन तरह के वैक्सीन बन सकते हैं
1. एमआरएनए वैक्सीन इसमें इसी वायरस का प्रोटीन लेकर उसे देखते हैं कि इससे इम्यून सिस्टम पर क्या फर्क पड़ता है।

2. स्टैंडर्ड वैक्सीन जो वायरस के कमजोर वर्जन को लेकर बनाया जाता है, लेकिन उससे बीमारी नहीं फैलती।

3. किसी और वायरस की बैकबोन में कोरोना के वायरस की प्रोटीन कोडिंग को लगाकर के वैक्सीन बनाया जाता है।

4. वायरस का प्रोटीन लैब में बनाकर उसको एक किसी दूसरे स्टीमुलस के साथ लगाया जाता है। ये चार तरह के वैक्सीन सब लोग बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए पूरा तंत्र लगा हुआ है और ये भारत को कोरोना से बचाने के लिए सक्षम है। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि अधिकतर वैक्सीन और दवाइयां हमारे देश में बनती हैं और दूसरे देशों में जाती हैं। तब तक हमें पांच काम करने जरूरी हैैं। जैसे सफाई, सरफेस की सफाई, सोशल डिस्टेंसिंग, ट्रैकिंग व टेस्टिंग इतियादी। वैक्सीन और दवाई के साथ हम और तेजी से कोरोना से लड़ सकते हैं, लेकिन तब तक हमेंं इसी का पालन करना होगा।

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