जानें, आज ही क्यों मनाया जाता है पंचायती राज दिवस

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नई द‍िल्‍ली, रीना गुप्‍ता। पूरे देश को चलाने में सिर्फ केंद्र सरकार या सिर्फ राज्य सरकार सक्षम नहीं हो सकती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर भी प्रशासनिक व्यवस्थ जरूरी है। इस काम के लिए बलवंत राय मेहता की अध्यक्षता में 1957 में एक समिति का गठन किया गया था।

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस

हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। 1993 में इस दिन से 73वां संविधान अधिनियम लागू हुआ था। इस एक्ट को 1992 में पारित किया गया था। पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2010 में मनाया गया था। 73 वें संशोधन अधिनियम के अधिनियमन ने भारत के इतिहास में एक निर्णायक क्षण का नेतृत्व किया था। इसने राजनीतिक शक्ति को जमीनी स्तर तक विकेंद्रीकरण करने में मदद की।

पंचायती राज का इतिहास

सबसे पहले 1957 में बलवंतराय मेहता की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई. समिति ने सत्ता के लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की सिफारिश की थी। भारत में पहली बार पंचायती राज की अवधारणा का गठन किया गया। समिति ने त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की अनुशंसा की थी।

गांव स्तर पर ग्राम पंचायत

ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति जिला स्तर पर जिला परिषद महत्वपूर्ण तथ्य देश का पहला राज्य बना, जहां पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई थी। इस योजना का उद्घाटन तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 को नागौर जिले में किया था। यह योजना बाद में 1959 में ही आंध्र प्रदेश में भी लागू की गई थी। हमारे देश में 2.54 लाख पंचायतें हैं। जिनमें से 2.47 लाख ग्राम पंचायतें हैं। 6283 ब्लॉक पंचायतें हैं। 595 जिला पंचायतें हैं। देश में 29 लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधि हैं। पंचायती राज मंत्रालय पंचायतों को दिए गए पुरस्कारों को आयोजित करता है। ये पुरस्कार प्रत्येक 24 अप्रैल को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को दिया जाता है।

ग्राम सभा के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ग्राम पंचायतों को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार दिया जाता है। दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार पंचायतों के सभी तीन स्तरों के लिए सामान्य और विषयगत श्रेणियों में दिया जाता है। बाल सुलभ ग्राम पंचायत पुरस्कार, ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार – देश भर में तीन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया जाता है। पंचायतों के ई-सक्षमता के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्यों को ई-पंचायत पुरस्कार दिया जाता है।
अगर गांव खत्म हो जाएंगे, तो देश खत्म हो जाएगा। इसलिए उन्होंने ग्राम स्वराज पर बल दिया। उन्होंने जीवंत गांवों का सपना देखा था, जो भारत की रीढ़ बने। उनके ग्राम स्वराज का मतलब था, ग्राम प्रशासन।

महात्मा गांधी पंचायतों की सफलता में केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, सिक्किम और प. बंगाल ने बेहतर किया है.कुछ पंचायत जिन्होंने ट्रेंड सेट कर दिया। महाराष्ट्र की चनुशा ग्राम पंचायत ने ओडीएफ गांव के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए कई शौचालयों का निर्माण किया और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए आरओ सिस्टम स्थापित किया। पंजाब की ग्राम पंचायत सच्चरदार ने गांव की हर गली और कोने को रोशन करने के लिए सोलर पैनल स्थापित किया। झारखंड की दोहा कुट्टू पंचायत ने जंगल के महत्व को समझा, यहां की महिलाएं पेड़ को अपना भाई मानती हैं क्योंकि समाज में नई परंपरा शुरू हुई। यहां के लोग वनों की कटाई के सख्त खिलाफ हैं।  आधी आबादी को पंचायती व्यवस्था से कितना फायदा हुआ।

— छवी राजावत, राजस्थान – इन्होंने सोडा गांव का सरपंच बनने के लिए देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों में से एक की नौकरी छोड़ दी।
— शाहनाज खान, हरियाणा- भरतपुर में गढ़जेन के ग्रामीणों ने मार्च 2018 में एमबीबीएस की छात्रा शाहनाज़ खान को अपना सरपंच चुना।
–भक्ति शर्मा, मध्य प्रदेश – भक्ति शर्मा अमेरिका से वापस बरखेड़ी अब्दुल्ला गांव में सरपंच चुनाव लड़ने के लिए लौटीं और भारत की शीर्ष 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल हुईं।

–ई- पंचायत

पंचायती राज एप वर्तमान में एंडरॉयड उपकरणों के लिए उपलब्ध है. इसे और अधिक इंटरेक्टिव बनाने के लिए, टिप्पणियों और प्रतिक्रियाओं को पोस्ट करने का एक विकल्प पाठकों को एप पर प्रदान किया जाएगा। राज्य विधानसभाओं के पास पंचायतों को ऐसी शक्तियां और अधिकार देने के लिए विधायी शक्तियां हैं, जो उन्हें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हो सकती हैं। उन्हें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाओं को तैयार करने और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। राज्य पंचायत को लगान वसूलने, कर वसूलने, ड्यूटी लगाने, टोल, फीस आदि के लिए अधिकृत कर सकता है। अनुदान सहायता दे सकता है। क्षेत्र के विकास के लिए राज्य के समेकित कोष से पंचायतें। निष्कर्ष में यह कहा जा सकता है कि देश में पंचायती राज प्रणाली का प्रारंभ कई लोगों के हाथों में सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए एक अच्छा कदम है।

—महिला सरपंच

73 वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम पंचायतों में महिलाओं को पंचायत के प्रत्येक स्तर पर उनके लिए एक तिहाई से कम सीटें न देकर आरक्षण प्रदान करता है. बीस राज्यों अर्थात् असम, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल ने बनाया है. पंचायतों में महिलाओं के लिए उनके राज्य पंचायती राज अधिनियमों में सभी स्तरों पर कुल सीटों के पचास प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान. पंचायती राज (एमओपीआर) की मंत्रालय भी निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जानकारी के आधार पर, पंचायती राज संस्थाओं में 106100 महिला सरपंच / प्रधान हैं।

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